चाय की दूकान सूचना का बड़ा माध्यम होता है।

भारत के ग्रामीण समाज में चोक-चोराहे और चाय की दूकान समाज के लिए काफी महत्व रखता है। क्योंकि यहाँ हर रोज ग्रामीण समाज के लोग इकट्ठा होता है। जिसमे समाज के बड़े-छोटे सभी समुदाय के लोग होते है। वैसे तो गाँव में हर घर में लगभग चाय बनती है। लेकिन चोक-चोराहे की दूकान में चाय पीने में समाजिक स्वाद मिलता है। जिसमे अधिक मात्रा राजनीती और समाजिक व्यवहारों का होता है।

यहाँ समाज के लोग सुबह और शाम को चाय दूकान में काफी लोग इकट्ठा होता है। लेकिन सुबह की चाय में काफी ताजगी होता है। सुबह 4 बजे से 8 बजे तक, यहाँ पर लोग अपने समाज से लेकर देश-दुनिया तक की बाते करते है। जिसमे राजनीती के विषय के उपर चर्चा अधिक होती है। ये लोग देश के कोई भी मंत्री या पार्टी के बारे में गलत समाचार सुनता है तो उसको भला-बुरा कहने में भी कोई हिचक नहीं होता है। ये लोग उसका जवाब आने वाले चुनाव में दे देता है। ऐसा मालूम होता है की यही लोग देश को चलता है। और ये बात सही भी है। क्योंकि भारत गाँवों का देश है। ग्रामीण समाज समाचार-पत्र पहुचने में समय लग जाता है। लगभग 12 बजे से लेकर 2 बजे दिन तक लोगों के हाथों में पहुँचता है। एक गाँव में लगभग 10-15 लोगों के घर में पहुचता होगा। लेकिन पढने वालों की संख्या 100 से अधिक होगा। बाकि लोग, देश दुनिया के समाचार चाय की दूकान से चर्चा के माध्यम से समाज के लोगों में पहुँच जाता है। कुछ लोग रेडियो और टीवी के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर लेते है। इसलिए ग्रामीण समाज में चाय की दूकान सूचना का बड़ा माध्यम होता है।