
भारत की जमीन जहाँ आज भी भारत बसता है। जो अपने संस्कृतियों और कर्तव्यों को सम्भाल कर रखें हुआ है। अगर आज विशाल भारत खड़ा है तो इसी ज़मीन के उपर। जिसे हमलोग गाँव कहते है। वैसे ये एक छोटा रूप दिखाता है। लेकिन भारत के पास अभी ६,४१,००० गांवें है। जहाँ सिर्फ खेती होता है। जिससे भारत के लोगो को भोजन प्राप्त करतें है। गाँव के लोग दिखने में साधारण होते है। लेकिन आजतक भारत के उपर जितने भी विपदा के समय गाँव लोगो ने बड़े-बड़े आंदोलनों को सफलता दिलाये है। चाहे वो गाँधी जी, जयप्रकाश नारायण या अन्ना हजारे नेतृत्त्व किया हो। किसी भी व्यक्ति को महानता प्राप्त होता है। उसका चुनाव साधारण गाँव में रहने वाले व्यक्ति के द्वारा होता है। अगर देखा जाय तो अधिकतर महान व्यक्ति किसी न किसी गाँव का रहने वाला ही होता है। जिसको हमलोग इतिहास के पन्नों को उलटकर देख सकते है। जो साफ-साफ लिखा हुआ है।
हम बात कर रहे है। नीतीश जी की 'सेवा यात्रा' की। शायद, नीतीश जी भारत के पहला मुख्यमंत्री होगें जो समाज के लोगों को समस्याओं को जानने या समझने के लिए क़स्बा, गाँव और लोगों के नजदीक गए है। वह भी साफ-सुथरे मन से, एक आम आदमी के रूप में। इसमे किसी प्रकार का पार्टी या राजनीतिक सोंच नहीं है। वह भी ऐसे समय में, ना आगे चुनाव का दृश्य है। यह देखने के लिए गए हैं की उनका काम समाज में सही रूप से हुआ है या नहीं। वह खुद अपनी नजरों से देखना चाहते है। और यह एक तरह से उनके लिए जरुरी भी है। तभी इनको समाज के कमीया दिखाई देगा। जिसको समझना उनको बहुत जरुरी है। इन्होने अपने राज्य के मुख्यमंत्री पद के साथ-साथ सामाजिक दायित्व को भी बहुत अच्छी तरह से निभा रहें है। जिसको हमलोग सलाम करते है। जिससे बिहार को एक नया रूप मिला है। सारे देशवासियों का कहना है।