गणतंत्र दिवस- हमारा बच्चपन, स्कूल, गाँव और यादें

गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस, हर व्यक्ति के दिल के अंदर देशभक्ति की भावना और बच्चपन की यादें मन को ताजा कर देता है। २ मिनट के लिए ही सही, हर व्यक्ति अपने बच्चपन के कुछ पल खुशिया और उमंग के साथ अपने-अपने दोस्तों के साथ गाँव के छोटे स्कूल में गुजारे हैं। आज भी भारत के गांवों में राष्ट्रीय पर्व में बच्चों के अंदर काफी खुशियाँ होता है। बच्चें पर्व की तेयारी दो-तीन दिन पहले से शुरू करने लगता है। बच्चे की इस तेयारी में समाज के बड़े-बूढ़े भी उसका साथ देते है। स्कूल के शिक्षक अपने सभी विधायार्तियो को अलग-अलग कामों की तेयारी में लगा देता है। ये पर्व स्कूल शिक्षा का बहुत बड़ा त्यौहार होता है। शायद, हमारे शिक्षा का बहुत बड़ा सम्बन्ध इस त्यौहार से होता है। जहाँ पर बच्चे अपने देश की सेवा और सुरक्षा के विषय पर ज्ञान प्राप्त करता है। जिसमे हमारे देश के महान देशभक्त स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बताते है। उनलोगों ने भारत को आजाद कराने में किस तरह से सहयोग और अपना बलिदान भी दिया। जिनके वजह से आज हमलोग आजाद भारत में रह रहें। हमलोगों आज भी अपने देश की लिए होसला बुलंद है।

२६ जनवरी आज है! माँ-बच्चों को स्कूल भेजो! स्कूल के बच्चे गाँव में घूम-घूमकर नारा लगते हुए चला जा रहा है। सुबह का ६ बज रहा है। बच्चों की आवाज़ से गाँव के सोया व्यक्ति जाग जाता है। कुछ माता-पिता अपने बच्चों को जल्दी तेयार कर स्कूल भेजता है। बच्चे भी इस दिन का पूरी उत्सुकता से इंतजार करता है। कागज झंडा लिए छोटे-छोटे बच्चे उस समूह में शामिल होकर जिंदाबाद कहते हुए उसके साथ चल देता है। वीर भगत सिंह अमर रहे! सुभाष चन्द्र बोस अमर रहे! गाँव के गलियारों नारों गूंज बढती चली जाती है।

सुबह ७ बजे तक गाँव के सभी बड़े-बूढ़े जाग जाते है। गाँव के अंदर देशभक्ति गानों की गूंज पुरे वातावरण भींगा देता है। जिससे लोगो अंदर देशभक्ति की भावना में भींग जाते है। समाज के लोग अपने पास के स्कूल में जाकर बच्चे के होसले को बढ़ाते है। स्कूल फूलों और रंगों से पूरी तरह सजा दिया जाता है। बच्चे रंग-बिरंगे कपडे पहनकर स्कूल के सुन्दरता हो और भी बढ़ा देता है। दिल्ली के लालकिले के उपर झंडा वंदन हो जाने के बाद, स्कूल के शिक्षक अपने बच्चो को कतार में लगाकर राष्ट्रीय गीत के साथ गाँव के मुख्य व्यक्ति के हाथों झंडावंदन करवाते है। शिक्षक समाज के लोगों और बच्चों के बीच लड्डू या जलेबी बांटे जाते है। समाज के बच्चे इस आयोजन के खुशियों दिल में बसाकर अपने-अपने घर की ओर चले जाते है। कुछ स्कूल में संस्कृति कार्यक्रम दिनभर चलता रहता है। जिसमे हमारे देशभक्तों के बलिदान रूपों दिखाते है।